शोधावरी’ के तत्वावधान में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित डॉ. अवधेश कुमार राय की पुस्तक ‘स्वाधीनता आंदोलन और हिंदी साहित्य’ का लोकार्पण 10 अगस्त 2025 को जे.पी. नाइक भवन मुंबई विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे थे। कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों का स्वागत किया गया। इसके बाद पुस्तक के लेखक डॉ. अवधेश कुमार राय ने अपना अभिमत व्यक्त किया। डॉ. राय ने अपना अभिमत व्यक्त करते हुए बताया कि किस तरह ब्रिटिश औपनिवेशवाद की नींव पड़ी और स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि क्या थी? उन्होंने हिंदी नवजागरण और हिंदी साहित्य के सभी विधाओं के रचनाधर्मियों के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित किया और कहा कि यह पुस्तक हिंदी साहित्य की विधाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन का दस्तावेजीकरण है।
पुस्तक पर प्रथम वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि हममें प्रतिरोध करने की क्षमता का अभाव था, जिसके कारण हम गुलाम हुए। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि और उसके पूर्व हुए अनेक विद्रोह के विस्तृत चर्चा की गई है। पुस्तक में नवजागरण और हिंदी साहित्य की विधाओं के माध्यम से स्वाधीनता संघर्ष को किस तरह से रेखांकित किया गया है, इसका भी उल्लेख किया, लेकिन देश के बाहर हुए स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख हिंदी साहित्य में न मिलने की भी बात की।
इस अवसर पर बोलते हुए यशपाल सिंह ‘यश’ ने बताया कि किस तरह किसी काल खंड को समझने के लिए साहित्य व इतिहास जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य के इतिहास को किस तरह रुचिकर बनाया जा सकता है, इसकी झलक इस पुस्तक में देखी जा सकती है। उन्होंने हिंदी कविता और स्वतंत्रता आंदोलन पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया और अपनी एक कविता भी सुनाई।
मुंबई विश्विद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. हूबनाथ ने कहा कि इस पुस्तक को और विस्तार दिया जा सकता है और हर एक विधा के स्वाधीनता आंदोलन में प्रदेय पर एक पुस्तक लिखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि स्वाधीनता आंदोलन में अन्य रचनाधर्मियों की अपेक्षा पत्रकार ज्यादा जेल गए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने लेखक से अपने तीन दशक के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि लेखक समाजवादी साहित्य का अध्येता है और उसमें इन मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा है। उन्होंने विस्तार से अकादमी की पुस्तक लेखन योजना, उसकी कठिनाइयों तथा आजादी के अमृत महोत्सव पर अकादमी द्वारा 10 पुस्तकों के प्रकाशन की व्यवस्था पर प्रकाश डाला।
अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी ने स्वाधीनता आंदोलन में गांधी जी के नेतृत्व और उनकी पत्र ‘हरिजन’ का उल्लेख किया। उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी रचनाधर्मियों के महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा की और इस महत्वपूर्ण विषय पर लेखन के लिए लेखक को बधाई दी। उन्होंने लेखक की वैचारिक प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया और अकादमी को भी इस तरह के प्रकाशन के लिए साधुवाद दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रीता दास राम ने किया। आभार विद्यार्थी रोहित ने व्यक्त किया। इस अवसर पर अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।