मुंबई विश्वविद्यालय के फिरोजशाह मेहता सभागार में हिंदी विभाग और केंद्रीय हिंदी निदेशालय की 27 से 29 मार्च के बीच तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए कुलगुरु डाॅ.रवीन्द्र कुलकर्णी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कौशल विकास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य के माध्यम से कौशल विकास की बड़ी संभावना है। हमें भाषा और साहित्य को नई तकनीक से जोड़ना होगा। इस अवसर पर केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक डाॅ.सुनील कुलकर्णी ने कहा कि हम निदेशालय के माध्यम से कौशल विकास के लिए अनेक योजनाएँ चला रहे हैं। उन्होंने मराठी संत कवि तुकाराम के दृष्टांत द्वारा श्रवण कौशल के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी का आरंभ उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और प्रख्यात गायिका डाॅ.सुरुचि मोहता के सरस्वती वंदना द्वारा हुआ। हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डाॅ.करुणाशंकर उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कौशल विकास का स्वरूप स्पष्ट किया। उन्होंने वाल्मीकि रामायण में हनुमान-राम के बीच सम्पन्न वार्ता के माध्यम से संवाद कौशल के आदर्श रूप पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर बीज वक्तव्य देते हुए डाॅ.सूर्यप्रसाद दीक्षित ने प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना का संदर्भ देते हुए पांच सौ प्रकार के कौशल विकास की चर्चा की । इस सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ.नरेंद्र पाठक, मंजू लोढ़ा, वीरेन्द्र याज्ञि, मानविकी संकाय के अधिष्ठाता डाॅ.अनिल सिंह और निदेशालय के सहायक निदेशक डाॅ.दीपक पांडेय उपस्थित थे। इस अवसर पर निदेशालय की पत्रिका भाषा और पुस्तिका हिंदी की मानक वर्तनी का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। साथ ही, वीरेन्द्र याज्ञिक की पुस्तक ‘महाभारत का मंतव्य’ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। इस सत्र का सफल संचालन डाॅ.सचिन गपाट ने किया और डाॅ.दत्तात्रय मुरुमकर ने आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी का अगला सत्र हिंदी भाषा, मीडिया, अनुवाद और कौशल विकास पर सम्पन्न हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ.सी.जयशंकर बाबू ने की। इस सत्र में डाॅ.संतोष मोटवानी, जी बिज़नेस के कार्यकारी संपादक अमित कुमार दत्ता, डाॅ.दयानंद तिवारी, विद्याधर जोग, डाॅ.दिनेश पाठक, शाश्वत चटर्जी, सोनल सिंह, वैशाली पाचुंदे और डाॅ.इंद्रकुमार विश्वकर्मा ने कौशल विकास के विविध संदर्भों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय से पधारीं डाॅ.प्रेमलता ने किया और डाॅ.सचिन गपाट ने आभार प्रकट किया।
संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रात:काल ‘हिंदी कविता और कौशल विकास’ पर सत्र सम्पन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष डाॅ.शीतला प्रसाद दुबे ने की। इस सत्र में डाॅ.मिथिलेश शर्मा, डाॅ.मीरा सिंह, डाॅ.संजय सिंह, डाॅ.दिनेश कुमार, डाॅ.अजित राय, डाॅ.जनक नंदिनी त्रिपाठी, डाॅ.कंचन यादव, राजेश दुबे, आनंदप्रकाश शर्मा और ऋचा गायकवाड़ ने अपने वक्तव्य दिए। इस सत्र का संचालन डाॅ.हनुमंत धायगुड़े ने किया। भोजनोपरांत अगला सत्र ‘हिंदी कथासाहित्य और कौशल विकास’ पर सम्पन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ निबंधकार डाॅ.श्रीराम परिहार ने की। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में गुवाहाटी विश्वविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ.रीतामणि बैश्य उपस्थित थीं। इस सत्र में डाॅ.सतीश पांडेय, डाॅ.प्रेमलता, डाॅ.श्यामसुन्दर पांडेय, डाॅ.सत्यवती चौबे, डाॅ.वेदप्रकाश दुबे एवं डाॅ.मेदिनी अंजनीकर ने अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन डाॅ.जनक नंदिनी त्रिपाठी ने किया और डाॅ.हनुमंत धायगुडे ने आभार माना।
संगोष्ठी के तीसरे दिन का प्रातःकालीन सत्र ‘हिंदी नाटक, सिनेमा, विविध कलाएं और कौशल विकास’ विषय पर डाॅ.जवाहर कर्णावट की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रख्यात अभिनेता अखिलेन्द्र मिश्र ने कहा कि भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र में अभिनय कौशल का मानक प्रस्तुत किया है। आज का सिनेमा भी नाटक ही है। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि वरिष्ठ पत्रकार और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और हम पारंपरिक रूप से कौशल युक्त राष्ट्र हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ने भारतीयों के कौशल को विश्वस्तरीय बनाने का कार्य किया है। इस सत्र में डाॅ.पल्लवी प्रकाश, संज्योति सानप, डाॅ.भारती सानप, डाॅ.मृगेन्द्र राय, डाॅ.रामदास तोंडे, डाॅ.संजय प्रभाकर, डाॅ.मनोज कुमार दुबे, नीलम यादव और आशा शेनाॅय ने कथित विषय पर अपने विचार प्रकट किए। इस सत्र का संचालन मीनू मदान ने किया और डाॅ.सुनील वल्वी ने आभार प्रकट किया।
तीसरे दिन भोजनोपरांत महाराष्ट्र के अपर पुलिस महानिदेशक और फोर्स वन के निदेशक कृष्ण प्रकाश की अध्यक्षता में समापन सत्र सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक और भारत वैभव जैसे कालजयी ग्रंथ के लेखक डाॅ.ओमप्रकाश पांडेय उपस्थित थे आपने भाषा की उत्पत्ति का अत्यंत मौलिक एवं वैज्ञानिक सिद्धांत देते हुए वैदिक काल से अब तक के कौशल विकास को रेखांकित किया। इस सत्र का संचालन डाॅ.सुनील वल्वी ने किया और हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डाॅ.करुणाशंकर उपाध्याय ने सभी उपस्थित अतिथियों और गणमान्य लोगों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। संगोष्ठी का समापन प्रख्यात गायिका डाॅ.सुरुचि मोहता द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत के माध्यम से हुआ। इस संगोष्ठी में भारी संख्या में प्राध्यापक, साहित्यकार, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।