करुणाशंकर उपाध्याय को अखिल भारतीय आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार प्रदत्त

करुणाशंकर उपाध्याय

प्रख्यात आलोचक और मुंबई विश्वविद्यालय के वरिष्‍ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डाॅ. करुणाशंकर उपाध्‍याय को दिनांक 25 अगस्त 2025 को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके आलोचना ग्रंथ ‘जयशंकर प्रसाद महानता के आयाम’ के लिए म.प्र.साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी.नामदेव और सुशील दोषी के हाथों प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के अंतर्गत शाल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और एक लाख रुपए का चैक प्रदान किया गया ।

ध्यातव्य है कि मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर और आलोचक डाॅ.करुणाशंकर उपाध्याय इस समय हिंदी के सबसे चर्चित आलोचक हैं। आप भारतीय और पाश्चात्य काव्य शास्त्र के अधिकारी विद्वान हैं। आप आलोचना की अद्यतन पद्धतियों से भी पूर्णत: विज्ञ हैं। आप भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में नूतन प्रतिमानों का निर्माण करते हैं।ध्यातव्य है कि इनकी पुस्तक’ मध्यकालीन कविता का पुनर्पाठ’ पर आयोजित परिचर्चा के अवसर पर शीर्ष साहित्यकार चित्रामुद्गल ने डाॅ. उपाध्याय को आज का सबसे बड़ा आलोचक कहा था। तदुपरांत हिंदी साहित्य भारती द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रोफेसर आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने इन्हें वर्तमान शती का आचार्य रामचंद्र शुक्ल और डाॅ.अरविंद द्विवेदी ने उपाध्याय को अज्ञेय के बाद हिंदी का सबसे बड़ा अंत: अनुशासनिक आलोचक कहा था। इनके आलोचनात्मक लेखन पर ममता यादव ने जे.जे.टी. विश्वविद्यालय, झुंझनू, राजस्थान से पीएच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की है।

डाॅ.करुणाशंकर उपाध्याय की अब तक 20 मौलिक आलोचनात्मक पुस्तकें और 12 संपादित पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। गत वर्ष इनका आलोचना ग्रंथ ‘जयशंकर प्रसाद महानता के आयाम’ प्रकाशित हुआ है, जो इस समय विद्वानों के मध्य मीमांसा का विषय बना हुआ है। इस पर अब तक 21 संगोष्ठियां आयोजित हो चुकी हैं। ऐसा बहुत कम होता है जब कोई आलोचना ग्रंथ हिंदी जगत का इस प्रकार स्नेहभाजन बनता है। इसे हिंदी आलोचना में नए युग का सूत्रपात करने वाला ग्रंथ कहा जा रहा है। यह आलोचना ग्रंथ आलोचना विधा के खोए हुए गौरव को पुन: प्रतिष्ठित कर रहा है। प्रोफेसर करुणाशंकर उपाध्याय के राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 400 के आस-पास आलेख व शोध-लेख प्रकाशित हुए हैं। इनके कुशल निर्देशन में अब तक 35 शोधार्थी पी.एच.डी. और 55 छात्र एम.फिल. कर चुके हैं। इसके पूर्व भी प्रोफेसर करुणाशंकर उपाध्याय को राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो दर्जन से अधिक सम्मान – पुरस्कार मिल चुके हैं। संयोगवश गत वर्ष डाॅ.करुणाशंकर उपाध्याय को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का भी आचार्य रामचंद्र शुक्ल सम्मान प्राप्त हुआ है।

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