नोबेल पुरस्कारों में पुरुषों का बोलबाला क्यों?

नोबेल पुरस्कार

स वर्ष भी विज्ञान के सभी क्षेत्रों यानी भौतिकी, रसायन विज्ञान, और कार्यिकी/चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार विजेता पुरुष ही रहे। नोबेल पुरस्कार के 121 वर्ष के इतिहास में सिर्फ 18 वर्षों में ही ऐसा हुआ है जब किसी महिला को विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला हो। हाल ही में नोबेल पुरस्कार देने वाली दो समितियों ने साइंस पत्रिका के साथ आंतरिक संख्याओं को साझा किया है जो इस तरह की असमानता के पीछे के कारण उजागर करती है: नोबेल पुरस्कार के लिए महिलाओं का कम नामांकन। हालांकि महिलाओं के नामांकन पिछले कुछ वर्षों में दुगने हुए हैं लेकिन इनका प्रतिशत अभी भी काफी कम है।

कार्यिकी/चिकित्सा विज्ञान पुरस्कार के लिए नामांकित वैज्ञानिकों में महिलाएं 13 प्रतिशत और रसायन विज्ञान में मात्र 7-8 प्रतिशत थीं। इस मुद्दे पर युनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन की आणविक जीवविज्ञानी और वैज्ञानिक समुदाय में जेंडर असमानता की अध्येता जो हैण्डल्समैन इसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों की सामान्य समस्या के रूप में देखती हैं। यदि कोई नामांकित ही नहीं है, तो उसका चयन कैसे करें। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2020 में विज्ञान के 8 नोबेल विजेताओं में से 3 महिलाएं थीं। और तो और, रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार सिर्फ दो महिलाओं को दिया गया था। इसे देखते हुए सकारात्मक बदलाव की उम्मीद थी लेकिन इस बार के निर्णयों से हालात पहले जैसे ही नज़र आ रहे हैं।

हाल के वर्षों में नोबेल विजेताओं के बीच जेंडर असमानता को दूर करने तथा यूएस और युरोप के बाहर के लोगों और अश्वेत वैज्ञानिकों की कमी के मुद्दे पर काफी ज़ोर दिया गया है। 2018 में, भौतिकी और रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार देने वाली रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज़ ने अधिक विविधता को प्रोत्साहित करने के लिए नामांकन प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की थी। समितियों ने विश्व भर के अधिक से अधिक महिलाओं और वैज्ञानिकों को नामांकित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने अपने निमंत्रण में कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को शामिल करने के लिए परिवर्तन किए और वैज्ञानिकों को केवल एक नहीं बल्कि 3 खोजों को नामांकित करने की अनुमति दी गई। कुछ इसी तरह के परिवर्तन चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार देने वाली संस्था कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने भी किए।

गौरतलब है कि नोबेल फाउंडेशन नियम के चलते समितियां नामांकन सम्बंधी सूचनाओं को 50 वर्ष तक गुप्त रखती हैं। लेकिन समिति के सदस्यों ने इस बार साइंस पत्रिका के साथ इस डैटा का सार साझा किया है। कार्यिकी/चिकित्सा के लिए कुल नामांकन वर्ष 2015 में 350 थे और इस वर्ष बढ़कर 874 हो गए। इसी दौरान महिलाओं के नामांकन भी 5 प्रतिशत से बढ़कर 13 प्रतिशत हो गए। रसायन विज्ञान में भी महिला नामांकन 2018 की तुलना में दुगना हो गए हैं। हालांकि, भौतिकी समिति ने डैटा साझा करने से मना कर दिया लेकिन यह बताया कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के प्रतिशत में काफी तेज़ी से वृद्धि हुई है।

अलबत्ता, कई वैज्ञानिक इस वृद्धि से संतुष्ट नहीं है जब तक कि पुरस्कृत महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि नहीं होती। नामांकनों की छंटाई करने वाली समितियों के सदस्य भी इस वृद्धि से संतुष्ट नहीं है। चाल्मर्स युनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी की जैव-भौतिक रसायनज्ञ और रसायन विज्ञान समिति की सदस्य पेरनीला विटुंग स्टैफशी के अनुसार नामांकित लोगों में से महिलाओं का प्रतिशत काफी कम है और इसमें वृद्धि की आवश्यकता है।

विटुंग स्टैफशी का मानना यह भी है कि महिलाओं का प्रतिशत बढ़ाने के लिए समितियों को नोबेल-योग्य खोज की समझ को विस्तार देने की आवश्यकता है। हो सकता है कि हम कुछ विषयों और उम्मीदवारों को देख न पाते हों क्योंकि हम इस बात को लेकर संकीर्ण नज़रिया रखते हैं कि रसायन विज्ञान की महत्वपूर्ण खोज क्या है।

नोबेल पुरस्कार में महिलाओं के कम नामांकन के अलावा एक और समस्या है। पिछले 4 वर्षों में विज्ञान के नोबेल पुरस्कार चयन समितियों में अपेक्षाकृत कम महिलाएं रही हैं। यह भी सत्य है कि अपने पूरे करियर में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पुरस्कार जीतने वाली महिलाओं की संख्या कम होती है। लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है। यह तो समस्या को देखने का एक निष्क्रिय ढंग है जबकि नोबेल समितियों को आगे आकर कुछ करना चाहिए।

चयन समितियों के स्वरूप में परिवर्तन की आवश्यकता है। समितियों के सदस्य रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज़ के सदस्यों और कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसरों में से चुने जाते हैं। इस वर्ष भौतिकी समिति में 7 पुरुष और 1 महिला, रसायन समिति में 6 पुरुष और 2 महिला और कार्यिकी/चिकित्सा समिति में सबसे अधिक 13 पुरुष और 5 महिलाएं थीं।

विटुंग स्टैफशी बताती हैं कि समिति में उनकी उपस्थिति से जेंडर सम्बंधी मुद्दों पर चर्चा संभव हुई है। समिति की एक महिला सदस्य बताती हैं कि हालांकि नोबेल पुरस्कार देते समय जेंडर पर नहीं बल्कि पूरा ध्यान सिर्फ विज्ञान पर होता है। फिर भी महिलाओं के लिए चयन प्रक्रिया और समारोहों में भाग लेना काफी महत्वपूर्ण होगा ताकि वे अन्य महिलाओं के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में नज़र आएं। अलबत्ता, सिर्फ नज़र आना पर्याप्त नहीं होगा। अधिक पारदर्शी नामांकन प्रक्रिया से प्रस्तावक अधिक महिलाओं को नामांकित कर सकेंगे। फिलहाल कोई नहीं जानता कि किसी का नामांकन कैसे किया जाता है।

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